The Failure of Language (भाषा की असफलता)

कटिहार के बच्चों को अंधकारमय भविष्य से बचाने के उपाय  

यह निबंध मैं कटिहार के बच्चों के अभिभावकों लिए लिख रहा हूँ, खास कर इंग्लिश स्कूल में पढ़ने वालों के। हर साल कटिहार जैसे छोटी जगहों के हजारों बच्चों का भविष्य बिना वजह चौपट हो रहा है। इस लेख में मैं इस वृहत समस्या का समाधान भी दे रहा हूँ। कटिहार के बच्चों की असफलता की नीवं पांचवी कक्षा तक आते आते इतनी गहरी हो जाती है कि वे कभी  उबर नहीं पाते हैं । मुझे आशा है कि बच्चों के मातापिता यथा शीघ्र समाधान को समझेंगे और उस पर कार्य करेंगे।

मेरा अनुभव 
पिछले दो साल से मैं कटिहार के कुछ बच्चों को फिजिक्स, केमिस्ट्री, और गणित पढ़ा रहा हूँ।  मैं मिरचाईबाड़ी के हरि शंकर उच्च विद्यालय का छात्र था और किस्मत से मैं आई आई टी पहुँच गया।  मैं निश्चित हूँ कि मेरी कक्षा के कुछ बच्चे मेरे से ज्यादा तेज थे और उन सभी को डॉक्टर या इंजीनियर बनना था।  उन दिनों मेरे ज्यादातर मित्र गरीबी से त्रस्त थे--पुस्तक, नोटबुक का अभाव था। व्याप्त गरीबी के कारण कुछ ही बच्चे सफल हो पाए, लाटरी मिलने की तरह।  आज कटिहार में समृद्धि बढ़ी है, बच्चों के पास पढ़ाई के साधनों की कमी नहीं है। माता पिता पढ़ाई पर खूब खर्च करने के लिए तैयार हैं।   लेकिन दुर्भाग्य से बच्चों के लिए सफलता आज भी लाटरी जैसी है, कुछ ही बच्चे सफल हो पाते हैं।  बच्चों को पढ़ाने के क्रम में मुझे पता चला कि मेरे समय में दुर्भाग्य गरीबी थी, आज के समय में बच्चों का अभिशाप है इंग्लिश!

"इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई आज कटिहार के अधिकांश बच्चों को असफलता की तरफ धकेल रही है।  दुःख की बात यह है कि आई आई टी या मेडिकल की प्रवेश परीक्षा के लिए इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई अनिवार्य नहीं है।  फिर भी इंग्लिश की ओर की अनावश्यक मानसिकता कटिहार के बच्चों के लिए बाधा गयी है। "

आई आई टी से पास करने के बाद मेरा सपना था कि मैं कटिहार वापस जा कर बच्चों को फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित अच्छे तरीके से पढ़ा कर कटिहार से ढेर सारे डॉक्टर और इंजीनियर बनाऊंगा। कुछ दिन पढ़ाने के बाद मुझे झटका लगा कि बच्चों को मैं न तो इंग्लिश में पढ़ा पा रहा था न ही हिंदी में। मेरा पहला महीना फिजिक्स या केमिस्ट्री पढ़ाने के बजाये  मेरा ज्यादा समय इंग्लिश समझने में जा रहा था।   मेरी क्लास में कटिहार के हर जाने माने स्कूल के बच्चे थे और वे कहीं से मंद बुद्धि के नहीं थे। उनकी भाषा की क्षमता--किसी भी भाषा का--विनाश हो गया था।  मैं सन्न रह गया।  जब मैं कटिहार में पढ़ाई कर रहा था, मेरी इंग्लिश की जानकारी नगण्य थी।  लेकिन मेरी हिंदी बहुत मजबूत थी, हरि शंकर नायक के शिक्षक जैसे वकील बाबू और विवेका बाबू शुद्ध हिंदी में फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाते थे, हमें सब कुछ समझ में आता था।

संयोग से हाल में, मुझे हरि शंकर नायक के बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला। वे हिंदी मीडियम में पढ़ रहे थे और उन्हें पढ़ाने में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई और मैं उनकी समझ से काफी प्रभावित हुआ।

भाषा और बच्चों के भविष्य का सम्बन्ध 
आपको शायद ऐसा लगे कि चूँकि आई आई टी या मेडिकल की प्रवेश परीक्षा के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित जरूरी है, भाषा का सफलता से ज्यादा सम्बन्ध नहीं है।  सच्चाई यह है कि बच्चों की बुद्धि का भाषा--किसी भी भाषा--से गहरा सम्बन्ध है।  जो बच्चे भाषा में कुशल होते हैं वे हर विषय में अच्छा करते हैं। मेरे बेटों की जब अमेरिका में पढ़ाई शुरू हुई, मैं हैरान हुआ कि शुरू से ही उनकी भाषा पर बहुत जोर दिया गया, उन्हें अच्छे साहित्यकारों की किताबें छोटी उम्र से ही पढ़ाई गयी।  फिर मेरी समझ आयी कि मुझे आई आई टी क्यों सफलता मिली।  भाग्यवश, बहुत छोटी कक्षा से मुझे साहित्य पढ़ने का शौक हो गया।  छठी कक्षा में मैं प्रेमचंद और फणीश्वर नाथ रेणु की कहानियां पढ़ा करता था।  मेरे घर के लोग शिकायत करते थे कि मैं स्कूल पढ़ाई में कम और उपन्यास पढ़ने में ज्यादा व्यस्त रहता था। आज मेरा पूरा विश्वास है कि मेरा आई आई टी में एडमिशन इस लिए हुआ क्योंकि मेरी भाषा (हिंदी) मजबूत थी।  अब मुझे यह भी समझ आया कि फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित की पढ़ाई और राष्ट्रकवि  रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं में एक जैसी ही जटिलता है।  बचपन में मैंने साहित्य पर जोर दे कर मैंने अपनी बड़ी सहायता की,  बिलकुल वही सहायता जो अमेरिका स्कूल के ने मेरे बच्चों को दी।

कटिहार में इंग्लिश का अभिशाप 
इंग्लिश बहुत ही सुन्दर भाषा है और मुझे भाषाओँ से बहुत लगाव है।  सौभाग्य से मुझे इंग्लिश और हिंदी के साथ जर्मन और पोर्तगेज़ भी सिखने का मौका मिला।  मैं बच्चों को आशीर्वाद देता हूँ कि उन्हें भी खूब विदेश भ्रमण करने का मौका मिले और विभिन्न भाषायें सीखने का।  लेकिन यह भी सत्य है कि इंग्लिश कटिहार के बच्चों की भाषा क्षमता का विनाश कर रही है।  मनुष्य और जंतुओं में एक बहुत बड़ा अंतर है भाषा का। मानव के बच्चे गर्भ में ही अपनी मातृ भाषा सीखने लगते हैं।  आपने देखा होगा कि तीन साल का बच्चा बिना किसी कोचिंग के अपनी भाषा में बात करने लगता है।  बच्चे कहानी सुनने के लिए लालायित रहते हैं।  भाषा बच्चों के दिमाग को तीक्ष्ण करती है, कहानियां जितनी जटिल हो, बच्चे का दिमाग उतना ही बढ़ता है।  लेकिन बच्चे जैसे ही पढ़ाई शुरू करते हैं, उन पर इंग्लिश का वज्रपात हो जाता है।  अगर अमेरिका के बच्चों को पहली कक्षा से जर्मन में पढ़ना पड़ता तो उनका वही हश्र होता।  इंग्लिश जो कटिहार में न तो घर में बोली जाती है नहि बाजार में।  कटिहार के बच्चों के लिए इंग्लिश में हिंदी जैसी क्षमता असंभव है।  इंग्लिश में कठिनाई होने के कारण, जो स्वाभाविक है, बच्चे भाषा पर ही ध्यान देना छोड़ देते हैं। मुझे यह देखकर कष्ट हुआ कि बच्चे बाहर की किताबें  बिलकुल नहीं पढ़ते हैं।  स्वाभाविक है कि अगर बच्चे को पढ़ने में आनंद नहीं आएगा, उनके लिए साहित्य पढ़ना बोझ जैसा हो जायेगा।  मुझे दुख होता है यह देख कर कि बुद्धिमान बच्चे भी इंग्लिश में कमजोर होने के कारण खुद को मुर्ख समझने लगते है।  जैसे कि मैंने पहले लिखा है, जीवन के शुरू के दिनों में भाषा में दक्षता नहीं होने से, किसी भी भाषा में, बच्चे का भविष्य अंधकार मय हो जाता है।

मैं देख रहा हूँ कि इंग्लिश का अभिशाप के कारण कटिहार के बच्चे फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित समझने के बदले,  इंग्लिश से जूझते रह जाते हैं। यह सच है कि अभी भी कुछ बच्चे कटिहार से सफल होते हैं, लेकिन उनकी सफलता लाटरी के जैसी है।  शिक्षा ऐसी हो कि अधिकांश बच्चे सफल हों।  

समाधान    
इस वृहत समस्या का समाधान बहुत सरल है, लेकिन अभिभावकों को भेड़ चाल से हटना होगा जो बहुत कठिन है। तथाकथित इंग्लिश मीडियम में बच्चों को पढ़ाना सती प्रथा और दहेज़ जैसी कुरीति हो गयी है।  आई आई टी या मेडिकल की प्रवेश परीक्षा के लिए इंग्लिश मीडियम अनिर्वाय नहीं है, बहुत सारे बच्चे हिंदी मीडियम में पढ़ कर आई आई टी या मेडिकल कॉलेज पहुँच रहे हैं।

अपने बच्चे के भविष्य के लिए आपको ये करना होगा।
1 . बहुत छोटी उम्र से बच्चों को हिंदी साहित्य पढ़ाइये।  फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ठेस में वही जटिलता है जो 12 वीं कक्षा के गणित में है।   आपको भी मजा आएगा और बच्चे के इंटेलिजेंस बढ़ेगा।
2 . अपने बच्चे के स्कूल से हिंदी मीडियम में पढ़ाने की मांग कीजिये।  कटिहार में इंग्लैंड और अमेरिका के शिक्षक नहीं आ सकते हैं।   कटिहार के इंग्लिश मीडियम के शिक्षक खुद ही इंग्लिश से त्रस्त रहते हैं कि उनसे बच्चों को ज्ञान देने की आशा व्यर्थ है।

Comments

  1. बहुत सुंदर। मुश्किल किताबों की होगी। हिन्दी में विज्ञान की किताबों की कमी है।
    हिंदी भाषा में अच्छी किताबे बननी चाहिए।

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  2. Good morning sir
    I'm Shweta Dwivedi..I'm an educator..I run a school in Pune, Maharashtra...# in English medium...not because I liked to open one but it was pressure on me to open the school in English medium if I want to run it successfully....in Maharashtra students are too poor behavioural wise ....language wise ...as they don't believe in exploring much....but parents want their kids to speak English fluently and that pressure is on school to teach them or they will remove their child ...in this situation what to say about Katihar and about Pune everywhere it remains the same...we are struggling with students to teach English rather than any other subject and unfortunately parents are also happy....and the irony is that we were subscribing Navneet Publications for our students where we had substantial amount of teaching material...but parents asked us to make some changes as English is not that good or say advance in these publications so we had to opt for Cambridge...."Marta Kya Na Karta" comptt. is too tough...we need to survive so we need to flourish English rather then any other language or subject...Yahi Bharat Ki vidambana hai...hum angreziyat me itne kho gaye ki aaj hum apne astitva ko hi kho baithe....aur apni kabiliyat dekhiye issi me apni tareef le rahe hain...jo joitna angrezi bolega woh utna kabil hoga... isliye Katihar ho ya Mumbai teach English parallaly along with other subject..nahi to hum Bhaiya ji ya Arre O Bihari ke naam se hi jaane jaayenge....yahi vidhi ka vidhan hai jiss orr hawa chale uss orr naiya Mod lo...to bach jaaoge nahi to majdhar me chale jaaoge....
    Regards
    Shweta Dwivedi
    ( Reference..Kamlesh Dutt Dwivedi
    IIT ..Kanpur)

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